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Thursday, 17 May 2012

why directions and magnetism

 

दिशा क्या होती है ? तंत्र मे क्यू इसको महत्व देते है ?
पृथ्वी जो हे वो माग्नेटिक है मतलब उसका उतर और दक्षिण ध्रुव होते है पोलरिटी होती है
उतर ध्रुव जो हे वो पॉज़िटिव  उर्जा से युक्त होता है और दक्षिण ध्रुव जो हे वो नेगेटिव उर्जा वाला
होता है मतलब उतर ध्रुव पर पॉज़िटिव एनर्जि आती है और नेगेटिव एनर्जि जो हे वो दक्षिण
ध्रुव से बाहर निकलती है
       हमारा शरीर भी मागनेटिक है उसमे शिर जो हे वो उत्तर ध्रुव है और  पैर दक्षिण ध्रुव हैं
अगर पृथ्वी के माग्नेटिस्म से हमारे शरीर का माग्नेटिस्म समांतर रहेगा तो हमे काफी उर्जा
आसानी से बिना कुछ किए मिलेगी जो ध्यान जप तप मे बहोत ही जरूरी है और अगर हमारे
शरीर का मेग्नाटिस्म पृथ्वी के मेग्नाटिस्म के विपरीत रहेग तो ध्यान लगाना एकाग्रता रखना
काफी कठिन होगा । इसी लिए तंत्र मे हर कार्य के अनुसार अलग अलग दिशा का वर्णन होता है
    आप अगर एक  लोहे के अणु की रचना देखेंगे और एक मेग्नाट की अणु की रचना देखेंगे
 तो आपको फर्क साफ दिखाई देगा लोहे मे अणु अस्त व्यस्त होते है सब अलग अलग दिशा मे
घूमते है और मेग्नाट मे सब अणु एक ही दिशा मे होंगे एक ही लाइन मे होंगे । इससे क्या फर्क
पड़ता है ? अगर आप के पास एक लेंस और कागज़ होगा तो आसानी से समज जाएंगे ।
इसमे पदार्थ के अणु की जगह सूर्य प्रकाश को लेना है अगर लेंस की मदद से सूर्य के सभी किरणों
को कागज़ पर एकत्रित करेंगे तो थोड़ी ही देर मे कागज़ जल उठेगा । क्यू जला कागज़ क्यू की
लेंस द्वारा सूर्य से सभी किरणों को एक ही जगह केंद्रित किया गया और प्रचंड उर्जा उत्पन्न होगई
जिसने कागज़ को जला दिया तो अब आप को समज आगया होगा के अणु का अस्त व्यस्त होना
और एक दिशा मे होने से क्या फर्क पद सकता है
           इसी तरह पदार्थ के अणु सूर्य प्रकाश की किरणों की जगह हमारे मन के विचार को रख देंगे तो आपको मालूम पड़ेगा की मन से सभी विचारो को एक ही जगह केंद्रित करने से कितनी
प्रचंड उर्जा उत्पन्न होगी । वो प्रचंड उर्जा आपके मन के संकल्प को हकीकत बनादेगी क्यू की
प्रचंड उर्जा से कुछ भी निर्माण हो सकता है

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