अगर आपके पैर मे बेडी होगी तो आप ठीक से चल भी नहीं पाएंगे तो कैसे दोड़ पाएंगे ?
ठीक इसी तरह हमारे मन मे काम क्रोध लोभ मोह जैसे अशुद्धीय रूप बेडी होंगी तो इष्ट के
दर्शन कैसे होंगे ? परमात्मा से कैसे मिलाप होगा ? कैसे अध्यात्म मे आगे यात्रा बढ़ेगी
कैसे योग मंत्र यंत्र तंत्र मे सफलता मिलेगी ?
इन अशुद्धियों का त्याग तो करना ही होगा अन्यथा बेडी पहेंकर कितना भी चले मंज़िल
नहीं मिलेगी । मंज़िल पाने के लिए तो कठिन परिश्रम करना पड़ेगा तेज़ दोड़ लगानी पड़ेगी
तभी जाकर मंज़िल मिलेगी
बेडी चाहे सोने की हो चाँदी की हो लोहे की हो या कोई और हो वो तो बेडी ही रहेगी बेडी सोने की भी होगी तो फायदा क्या उसका जो कोई कम न आए बेडी तो हर हाल मे बेडी ही रहेगी
हर हाल मे उसे निकालना ही पड़ेगा । चाहे मे अपने स्वार्थ के लिए अपने शत्रु से नफरत करू या
किसी ओर से नफरत करू वो तो नफरत ही रहेगी इसी लिए अपने मन के सभी दोष अशुधिया
जो बेडी स्वरूप है उनको बाहर निकालना ही होगा अन्यथा चलना बंद कर देना चाहिए
ठीक इसी तरह हमारे मन मे काम क्रोध लोभ मोह जैसे अशुद्धीय रूप बेडी होंगी तो इष्ट के
दर्शन कैसे होंगे ? परमात्मा से कैसे मिलाप होगा ? कैसे अध्यात्म मे आगे यात्रा बढ़ेगी
कैसे योग मंत्र यंत्र तंत्र मे सफलता मिलेगी ?
इन अशुद्धियों का त्याग तो करना ही होगा अन्यथा बेडी पहेंकर कितना भी चले मंज़िल
नहीं मिलेगी । मंज़िल पाने के लिए तो कठिन परिश्रम करना पड़ेगा तेज़ दोड़ लगानी पड़ेगी
तभी जाकर मंज़िल मिलेगी
बेडी चाहे सोने की हो चाँदी की हो लोहे की हो या कोई और हो वो तो बेडी ही रहेगी बेडी सोने की भी होगी तो फायदा क्या उसका जो कोई कम न आए बेडी तो हर हाल मे बेडी ही रहेगी
हर हाल मे उसे निकालना ही पड़ेगा । चाहे मे अपने स्वार्थ के लिए अपने शत्रु से नफरत करू या
किसी ओर से नफरत करू वो तो नफरत ही रहेगी इसी लिए अपने मन के सभी दोष अशुधिया
जो बेडी स्वरूप है उनको बाहर निकालना ही होगा अन्यथा चलना बंद कर देना चाहिए
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